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शीत युद्ध की शुरुआत,कारण और अंत

शीत युद्ध की शुरुआत : आप सभी ने कई अलग -अलग  प्रकार के युद्ध देखे होंगे लेकिन क्या आपने एक ऐसे युद्ध के बारे में कभी सुना जिसमे युद्ध होते - होते रुक गया हो,यानि एक प्रकार से पुर्नव्यापी रक्त रंजीत युद्ध का न  होना। दरसल इस प्रकार के  युद्ध को शीतयुद्ध कहा जाता है जिसमे केवल दोनों पक्षों के बिच तनाव होता है ,असल युद्ध होने की स्थिति बनी रहे पर युद्ध न हो।  विश्व युद्ध के बाद विश्व में कुछ ऐसी ही स्तिथि थी जिसे शीतयुद्ध कहा गया , यह शीतयुद्ध साल 1945 से लेकर 1991 जब सोवियत संघ का विघटन हो गया तब तक चला।  शीत युद्ध राजनीतिक, आर्थिक और प्रचार के मोर्चों जोर शोर से  जारी था और केवल हथियारों तक सीमित नहीं था ,शीतयुद्ध के केंद्र में दो महाशक्तियों का वर्चस्व था एक था संयुक्त राज्य अमेरिका और दूसरा सोवियत संघ।  पूंजीवादी खेमा जो की उदारवादी लोकतंत्र का समर्थक था संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में शीतयुद्ध में शामिल रहा इसे पश्चिमी गठबंधन के नाम से जाना जाता है  दूसरी ओर था पूर्वी गठबंधन जिसमे साम्यवादी विचारधारा के देश शामिल थे व ये सोवियत संघ के नेतृत्व में शीत युद्ध में शामिल हुए।   AL
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साँची के स्तूप का इतिहास और उससे जुड़े रोचक तथ्य ।

साँची के स्तूप  का इतिहास :  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है साँची का भव्य स्तूप है यह स्तूप भारत का राष्ट्रीय धरोहर तो है ही लेकिन खास बात यह है की साँची का स्तूप यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है जो की हमारे देश के लिए  काफी गर्व की बात है ।  साँची का स्तूप एक बुद्ध परिसर है इसका सम्बन्ध महात्मा बुद्ध से सीधे तौर पर है,यह काफी विशाल है और अर्धगोलाकार अकार में बना हुआ है । इसके आसपास भी अन्य कई स्तूप छोटे है  लेकिन सभी  स्तूपों का एक केंद्र यह ही है।  इस बुद्ध स्तूप को यूनस्को विश्व धरोहर सूची वर्ष 1989 शामिल किया गया ,साँची के स्तूप को बनाने की शुरुआत सम्राट अशोक द्वारा करवाई  गयी थी यह वही अशोक है जिनकी वजह से बुद्ध धर्म का काफी विस्तार हुआ।   सांची के स्तूप को लगभग 13वीं शताब्‍दी के बाद कई वर्ष के लिए तो लोग इससे भूल ही गए थे लेकिन 1818 में जर्नल टेलर जो की एक ब्रिटिश अधिकारी थे उनके द्वारा पुनः खोज लिया गया।  लगभग काफी दशको बाद में 1912 में सर जॉन मार्शल जो की एक पुरातत्विद और तात्कालिक पुरातत्‍व विभाग के महानिदेशक थे। उन्होंने  इस स्‍थल

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का इतिहास और विकास

भारत एक विविधताओं से भरा देश क्या आप सब ने कभी सोचा है की भारत में इतनी विविधता होने के बाद भी एकता की मिसाल कैसे बनी ? अलग-अलग विचारधाराओं , धर्मों ,भाषाओं और राज्यों के आधार पर बँटे ये लोग सदियों से साथ कैसे रहते आ रहे है ?  इसकी कई वजह है जिन्हें समझने  के लिए काफ़ी वक्त चाहिये लेकिन आज हम इनमे से एक कारण की बात करने वाले जो कि है हमारे भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा,जी हाँ तिरंगा जो हमें आज़ादी के बाद से आज तक संजोये हुआ है ये वही तिरंगा है जिसकी इज़्ज़त भारत का प्रत्येक व्यक्ति करता है चाहे वह किसी भी धर्म या जात से सम्बंध रखता हो ।  तो आइए साथियों जानते है भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा कैसे अस्तित्व में आया और क्या है भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास ? यह भारतवासियो के काफी रोचक है की भारत का राष्ट्रीय ध्वज कई परिवर्तनों से गुजरा है जिन्हे जानना हर भारतीय के लिए जरुरी है सबसे पहले हम हमारे राष्ट्रीय ध्वज के एतिहासिक पड़ावो पर एक नज़र डालते है उसके बाद हम अपने तिरंगे की बनावट और महत्व को समझेंगे।  भारत का प्रथम राष्ट्रीय ध्वज : भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज वर्ष 1906 में अस्तित्व में आ

क्या है मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना 2021 और इसके लिए कैसे करे रजिस्ट्रेशन।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना :  एक बात तो आप और हम सब जानते है  की भारत में नौकरियां तो बहुत है लेकिन नौकरी सिर्फ एक है और वह है एक IAS अफसर की , कई लोगो का सपना होता है की वह बड़े हो कर के प्रशासनिक सेवा अधिकारी बने लेकिन उन्हें सही राह नहीं मिलती और न ही वह इतने सक्षम होते है की  दिल्ली के मुखर्जी नगर जैसी जगह जाकर कोचिंग  ले सके इन्ही सब बातो को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार एक योजना लेकर आयी है जिसका नाम है " मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना " ।   इस योजना के तहत आईएएस ,आईपीएस ,एनडीए , पीसीएस , सीडीएस और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओ के लिए बिना किसी फीस के यानि मुफ्त में छात्रों को  कोचिंग प्रदान की जाएगी,अगर आप इक्छुक और आपके अंदर लगन है अपने क्षेत्र में कुछ करने की तो तुरंत रजिस्टर करे । Mukhyamantri Abhyudaya Yojana Online Registration Link    http://abhyuday.up.gov.in/hi_how-to-apply.php इस योजना का मुख्य उदेश्य आर्थिक रूप से कमजोर बच्चो को अधिक सहायता उपलब्ध कराना है।   यह योजना ख़ास उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए है इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की कक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई

द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास [ Second World War History In Hindi ]

  प्रथम विश्व युद्ध के बाद लोगो को लगा अब शायद आगे युद्ध न हो लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध पहले वाले से भी काफी खतरनाक था जिसने सारी दुनिया को दहला दिया था , दूसरे वर्ल्ड वॉर को वैश्विक युद्ध या पूर्ण युद्ध भी कहा जाता है जिसके पीछे एक कारण यह है की आमतौर पर युद्ध दो सेनाओ के बिच होता है लेकिन इस युद्ध में आमलोगो से लेकर मजदुर तक मारे गए।  प्रथम विश्व युद्ध की तरह ही यह युद्ध भी दो गुटों के बिच हुआ था जंहा एक तरफ था मित्र राष्ट्र और दूसरी ओर थे धुरी राष्ट्र।   READ ALSO -   प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत  मित्र राष्ट्रो का नेतृत्व ब्रिटैन , फ्रांस , चीन , संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और सोवियत संघ जैसे देश कर रहे थे  और दुरी ओर धुरी राष्ट्रो का नेतृत्व जर्मनी ,इटली ,जापान के द्वारा किया जा रहा था।   दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हुई थी 1 सितम्बर 1939 वही इस महा युद्ध का अंत हुआ साल 1945 के अगस्त माह  में भारी तबाही के साथ हुआ था।   यह विश्व के इतिहास की सबसे भयंकर लड़ाई थी इस युद्ध में 6 करोड़ से लेकर 8 करोड़ तक लोग मारे गए हैरानी की बात यह है की इसमें मरने वाले 5 करोड़ के करीब लोग तो आम नागरिक ही थे। 

कहानी महान नालंदा विश्वविद्यालय की साथ ही बख्तियार खिलजी की क्रूरता की।

आज हम जो आपको कहानी सुनाने वाले है उसका कोई भी पात्र काल्पनिक नहीं है इस कहानी में  सभी पात्र ,स्थान और घटना का वास्तविक जीवन से सीधा - सीधा सम्बन्ध  है ,आज के  समय में भारत में शिक्षा का स्तर आप जानते ही हो यही वो वजह है जो भारत के बच्चो को शिक्षा लेने के लिए भारत से बाहर जाने पर मजबूर कर देता है।  लेकिन क्या भारत में शिक्षा का स्तर शुरू से ही ऐसा है ? इसका जवाब है नहीं , भारत में एक वक्त ऐसा था की विश्व के अलग - अलग हिस्सों से छात्र भारत आते थे शिक्षा ग्रहण करने ,जी हाँ हम बात कर रहे है एशिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय नालंदा  विश्वविद्यालय  की जिसे कई बार नष्ट कर दिया गया।   नालंदा विश्वविद्यालय में छात्रों के रहने के लिए छात्रवास बने थे ,काफी विस्तृत पुस्तकालय था जिसमे  लाखो किताबे मौजूद थी , इस महान संस्थान में कई विषय पढ़ाये जाते थे जैसे इतिहास , राजनीती विज्ञान ,मनोविज्ञान ,आयुर्वेद और विज्ञान इत्यादि।   उस वक्त इस  भव्य यूनिवर्सिटी में 2000 विद्वान अध्यापक और 10000 बुद्धिमान छात्र  मजूद   थे जो की भारत समेत विश्व के  अलग - अलग हिस्सों से आये थे।   नालंदा इस वक्त बिहार में स्थि

प्रथम विश्व युद्ध | First World War In Hindi |

आज बात होगी उस युद्ध की जिसने पुरे मानव समाज को दहला कर रख दिया साथ ही बात यह भी होगी की किस प्रकार इस युद्ध के बाद फिर एक  युद्ध हुआ और उसके बाद दुनिया को मिला एक ऐसा सबक की इस युद्ध का तीसरा अध्याय अभी तक आरम्भ न हो पाया।  जी हां में बात कर रहा हु विश्व युद्ध की उसमे भी प्रथम विश्व युद्ध की , हम और आप ये बात तो अच्छे से जानते है की इस संसार की शुरुआत से ही कई सारे युद्ध हुए है लेकिन विश्व युद्ध जितना भयंकर युद्ध आज तक नही हुआ है तो इसलिए आज हम लेकर आए है विश्व युद्ध प्रथम का सम्पूर्ण इतिहास और उससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य । प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत -  ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य  के उत्तराधिकारी आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड की बोस्निया में साराजेवो का दौरा करते वक्त सर्बिया के राष्ट्रवादी  द्वारा मृत्यु कर दी गई जिसके जवाब में ऑस्ट्रिया साम्राज्य ने सर्बिया के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया,आस्ट्रिया और सर्बिया के बिच  शुरू हुए इस युद्ध ने ही आगे चल कर विश्व युद्ध का रूप ले लिया।  विश्व युद्ध की शुरुआत से ही यूरोप , एशिया और अफ्रीका में भारी संघर्ष हुआ , प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विश्व दो गुटों